तीन साल की मासूम से बलात्कार- हत्या के दोषी के खिलाफ डेथ वारंट जारी करने की मांग

सूरत. लिंबायत के गोड़ादरा क्षेत्र की तीन साल की बच्ची से बलात्कार कर उसकी हत्या के मामले में दोषी अनिल यादव की फांसी की सजा उच्च न्यायालय की ओर से बरकरार रखे जाने के बाद सरकार की ओर से गुरुवार को पॉक्सो एक्ट की विशेष अदालत में अर्जी दायर कर डेथ वारंट जारी करने की मांग की है।


मूलत: बिहार निवासी अनिल यादव पर तीन साल की बच्ची का अपहरण कर उससे बलात्कार और फिर हत्या करने का आरोप था। यह वारदात 14 अक्टूबर, 2018 को हुई थी। एक महीने में जांच पूरी कर पुलिस ने अनिल के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट पेश कर दी थी और पांच महीने में सुनवाई पूरी कर 31 जुलाई, 2018 को विशेष अदालत ने उसे दोषी करार देते हुए फांसी की सजा सुनाई थी। विशेष अदालत के फैसले के खिलाफ अनिल ने उच्च न्यायालय में अपील याचिका दायर की थी। 27 दिसम्बर, 2019 को उच्च न्यायालय ने अपील याचिका रद्द करते हुए निचली कोर्ट के फैसले को सही ठहराया और फांसी की सजा बरकरार रखी। उच्च न्यायालय के फैसले में सजा के आदेश पर रोक का कोई जिक्र नहीं किए जाने के कारण सरकार की ओर से गुरुवार को मुख्य लोकअभियोजक नयन सुखड़वाला ने विशेष अदालत में अर्जी दायर कर अनिल यादव के खिलाफ डेथ वारंट जारी करने की मांग की।


यह था मामला


गोड़ादरा क्षेत्र निवासी एक परिवार की तीन साल की बच्ची 13 अक्टूबर की शाम लापता हो गई थी। पुलिस ने अपहरण का मामला दर्ज कर जांच शुरू की, लेकिन बच्ची का पता नहीं चला। 14 अक्टूबर को अनिल यादव का कमरा बंद होने से पुलिस को शक हुआ। रूम का ताला तोड़ा गया तो पानी के ड्रम में बच्ची का शव बरामद हुआ। पोस्टमार्टम में बच्ची के साथ बलात्कार का खुलासा होने पर पुलिस ने अपहरण, बलात्कार और हत्या का मामला दर्ज कर अनिल यादव को बिहार से धर दबोचा था। 

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