बच्ची के अपहरण के मामले में दादा और चाचा को पांच साल की कैद

सूरत. बारह साल की बच्ची का अपहरण कर उससे बलात्कार के मामले में आरोपित दादा और चाचा को कोर्ट ने अपहरण के लिए दोषी मानते हुए पांच-पांच साल की कैद तथा पांच-पांच हजार रुपए जुर्माने की सजा सुना दी। हालांकि जांच में पुलिस की लापरवाही के कारण दोनों बलात्कार और पॉक्सो एक्ट की गंभीर धाराओं से निर्दोष छूट गए।

प्रकरण के अनुसार कड़ोदरा क्षेत्र निवासी ज्ञानसिंह और विवेकसिंह रिश्ते में चाचा-भतीजा हैं। दोनों 2017 में विवेक के बड़े भाई के घर में रहते थे। उनके बीच घर के खर्च को लेकर विवाद चल रहा था। भाई और चाचा से लगातार विवाद को लेकर विवेक घर छोड़कर अलग रहने चला गया, लेकिन ज्ञानसिंह उसके भाई के साथ ही रहता था। ज्ञानसिंह ने विवेक के भाई से बदला लेने के लिए 12 साल की पोती के अपहरण की योजना बनाई और 1 फरवरी, 2017 को उसे स्कूल छोडऩे के बहाने अहमदाबाद ले गया। विवेक भी वहां पहुंचा और दोनों किराए के मकान में रहने लगे। इस दौरान ज्ञानसिंह ने बच्ची के साथ बलात्कार किया। ृविवेक को इसका पता चला तो उसने भी भतीजी के साथ बलात्कार किया, जिससे वह गर्भवती हो गई। दोनों ने गोलियां खिला कर गर्भपात करवा दिया। बच्ची के पिता की शिकायत पर पुलिस ने अपहरण का मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी। पुलिस ने दोनों को पकड़ कर बच्ची को मुक्त करवाया और दोनों के खिलाफ अपहरण, बलात्कार तथा पॉक्सो एक्ट की धाराओं के तहत कोर्ट में चार्जशीट पेश की। मामले की सुनवाई पॉक्सो एक्ट की विशेष अदालत में चल रही थी। सुनवाई के दौरान सहायक लोकअभियोजक किशोर रेवलिया ने दलीलें पेश की। अंतिम सुनवाई के बाद कोर्ट ने दोनों अभियुक्तों को अपहरण के लिए दोषी मानते हुए आइपीसी की धारा 363 और 366 के तहत पांच-पांच साल की कैद और पांच-पांच हजार रुपए जुर्माने की सजा सुनाई।

मेडिकल एविडेंस नहीं जुटाए पुलिस ने

बच्ची ने अपने बयान में साफ कहा था कि दोनों अभियुक्तों ने उसके साथ बलात्कार किया था और गर्भवती होने पर उसे गर्भपात की गोलियां खिलाई थीं। इसके बावजूद पुलिस ने बच्ची की मेडिकल जांच करवा कर मेडिकल एविडेंस कोर्ट के समक्ष पेश नहीं किए। इसका लाभ दोनों अभियुक्तों को मिला। जांच में पुलिस की लापरवाही के कारण अभियुक्तोंं के खिलाफ बलात्कार और पॉक्सो एक्ट की धाराओं के तहत आरोप सिद्घ नहीं हो पाए। कोर्ट ने सबूतों के अभाव में दोनों को पॉक्सो एक्ट और बलात्कार की धाराओं से निर्दोष छोड़ दिया।

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